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लेख

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राचीन सोवा - रिग्पा चिकित्सा पद्धति
डॉ. मयंक कोहली

आम धारणा के विपरीत सोवा - रिग्पा, एक प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली है, ना कि तिब्बती। ऐसा माना जाता है कि जब बुद्ध ने वर्तमान बिहार के वैशाली में दुख निदान का अपना उपदेश दिया था तब वहां कई ज्ञानी लोग उपस्थित थे।

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धार पर जीना : उच्च हिमालय की वनस्पतियां
थिन्लीस चन्दोल

जब भी हम हिमालय कहते हैं, तो तुरंत विशाल पहाड़ों की बर्फ ढकी चोटियां, उबड़-खाबड़ ढलानें और कठोर मौसम हमारी कल्पना में आते हैं, जहां तेज हवाएं और शुष्क मैदान हैं। यहां की एक पुरानी कहावत है कि, “यहां के मैदान इतने बंजर और इतनी ऊंचाई पर हैं कि केवल सबसे अच्छा दोस्त और सबसे बहादुर दुश्मन ही यहां आने की हिम्मत करेगा।”

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शुक्पा - एक पवित्र पेड़
डॉ. कोंचोक डोर्जे

शुक्पा, जिसे जूनिपर भी कहते हैं, एक विशेष हरा पेड़ है। यह कभी-कभी छोटा कद का पेड़ हो सकता है, जो हमेशा हरा रहता है। जूनिपर सबसे ऊंची जगहों पर बढ़ता है, और इसे हर जगह देखा जा सकता है, सबसे अधिक यूरोप, उत्तर अमेरिका और एशिया के हिमालय पर्वत श्रृंगों में।

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खूबसूरत सियाह मेंतोक
छेमी लामो

अपने घर का एहसास क्या होता है? मेरे लिए, वो हैं मेरे जन्मभूमि स्पीती के पहाड़, उस पथरीली ज़मीन के नज़ारे, गहरी खाड़ियों, और वहाँ की ऊँची चोटियाँ। वो होती हैं चौड़े बुग्याल, तेज़ ठंडी हवा, गर्मियों में गांव की बगियाँ, पके जौ के खेत, बहते हुए पानी की नहर, और सियाह मेंतोक के सुंदर गुलाबी फूल।

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नारकासंग - किन्नौर के पवित्र फूल
महेश नेगी

किन्नौर, हिमाचल प्रदेश, भारत का एक जिला है, जिसे उसकी ऊंची पहाड़ियों और हरियाली से भरपूर घाटियों से जाना जाता है, जहां प्रकार-प्रकार के फूल खिलते हैं। यहां का विशेष मौसम, गर्मियों में मामूली गर्मियों और ठंडी में कठोर ठंडी, बहुत सारे आश्चर्यों के लिए एक वातावरण बनाता है। बसंत यहाँ की लोक संस्कृति और लोगो के रहन-सहन का हिस्सा हैं।

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हिमालय के अद्भुत रत्न का उद्भव :

सी बकथॉर्न - स्वास्थ्य और आश्चर्य की गाथा

शीतांश सयाल

हिमालय की महान चोटियों के बीच एक खजाना छिपा हुआ है, एक दुर्लभ और अद्भुत अनाज के दाने या कहें तो फल के रूप में, जिसका नाम है, सी बकथॉर्न, जिसे वंडर बेरी या लेह बेरी या लद्दाख गोल्ड के नाम से भी जाना जाता है। अपनी असाधारण पोषण क्षमता और चिकित्सीय गणों के कारण इसका बहुत मान है।

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लद्दाख की जंगली खाद्य वनस्पतियां
फुंत्सोग डोलमा

यह अपने आप ही उगते हैं। दूसरी बात यह है कि चूँकि यह बहुत ऊंचाई और ठंडे शुष्क मौसम के अनुकूल होते हैं, तो इनमें अन्य प्रकार के विभिन्न पोषक तत्व भी होते हैं, पनपते हैं, जो इन्हें कठिन मौसम, कीड़ों और हानिकारक सूक्ष्म जीवों से अपने को बंचाने में मदद करते हैं। इन अन्य पोषक तत्वों के कारण इनका औषधीय महत्व बहुत अधिक है, साथ ही स्वास्थ्य दृष्टि से भी यह बहुत लाभकारी हैं।

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